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भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान

अंतिम अद्यतन 09-06-2016, 15:52

भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान (आई सी आर आई)

हमारे बारे में

भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान ( आई सी आर आई) की स्थापान 1978 में, छोटी इलायची पर आधारभूत और अनुप्रयुक्त कार्य चलाने हेतु पूर्ववर्ती इलायची बोर्ड के अनुसंधान स्कन्ध के रूप में मैलाडुंपारा में हुई थी। स्थान-विशिष्ट समस्याओं को सुलझाने हेतु 1980 के दौरान दो क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशनें भी कर्नाटक के हसन जिले के सकलेशपुर और तमिलनाडु के डिंडिगल जिले के तड़ियांकुड़ीशि में स्थापित की गई।

सिक्किम और पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग जिले की सबसे प्रमुख नकदी फसल बड़ी इलायची पर अनुसंधान कार्य चलाने हेतु, तीसरा क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन गांतोक, सिक्किम में स्थापित किया गया।

भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान में चलाए जानेवाले अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य इलायची (छोटी व बड़ी दोनों) की उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके द्वार निर्यात मांग की पूर्ति हेतु पर्याप्त अधिशेष उत्पादित करने में मदद मिलेगी, जिससेकि मसाला कृषकों की कुल आमदनी में बढ़ोत्तरी होगी। अनुसंधान कार्य मुख्यतः केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के छोटी इलायची बढ़ानेवाए इलाकों के उपांतिक व कम उत्पादनवाले प्रदेशों तथा उत्तरपूरवी राज्यों के बड़ी इलायची बढ़ानेवाले प्रदेशों पर केन्द्रित है ।

अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र फसल सुधार, जैव प्रौद्योगिकी, फसल उत्पादन, फसल संरक्षण, फ़ासलोत्तर प्रौद्योगिकी व जैव खेती हैं। अनुसंधान विभाग द्वारा लिए गए मुख्य कार्यकलापों में कृषक प्रतिभागी अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मूल्यांकन आते हैं। पारिस्थितिक तंत्र व संरक्षण कार्यक्रमों में, जेर्मप्लासम संरक्षण, नाश्कजीव एवं रोग निगरानी, नाशकजीवों व रोगों केलिए जेर्मप्लासम छँटाई, जलवायू मानीटरिंग और फसल प्रभाव अध्ययन, नाशकजीवन अवशेषों का मानीटरिंग और मृदा-स्वास्थ्य विश्लेषण आदि शामिल हैं। इनके अतिरिक्त, उपजातीय विकास, एकीकृत नाशीजीव एवं रोग प्रबंधन तथा एकीकृत पोषक प्रबंधन के लिए टिकाऊ(स्थिर) उत्पादन प्रौद्योगिकियां भी ले ली जाती है। इसके अलावा, अधिकतर प्रभागों में कई बाहर से निधिबद्ध बहू-सांस्थानिक एवं देशीय परियोजनाएं चालू हैं।

आई सी आर आई मैलाडुंपारा में राष्ट्रीय इलायची जेर्मप्लासम संरक्षणालय भी है जो करीब 563 इलायची प्राप्तियों एवं विभिन्न कृषि-जलवायविक अंचलों के बारह संबन्धित वंशों को बनाए रखता है। वैसे ही, सकलेशपुर का आर आर एस और गान्तोक का आर आर एस क्रमशः छोटी इलायची व बड़ी इलायची के जेर्मप्लासम निधान बनाए रखते हैं।

 

 

 

 

अधिदेश

  • इलायची (छोटी व बड़ी) पर आधारीय और अनुप्रयुक्त अनुसंधान कार्य चलाना

  • निर्यातोन्मुख अनोखे मसलों पर आधारीय और अनुप्रयुक्त अनुसंधान हेतु प्रौद्योगिकियों का विकास करना

  • आई सी ए आर, राज्य कृषि विश्वविद्यालय (एस ए यू) एवं अन्य अभिकरणों के अधीन आनेवाले अन्य अनुसंधान संशतनों द्वारा विकसित सभी मसालों पर खेत-अनुकूली जांच, प्रौद्योगिकियों का मूल्यांकन व विधीयन (ऑन-फार्म अनुसंधान व प्रदर्शन) आयोजित करना

  • स्वच्छ मसालों के उत्पादन हेतु मसालों के प्रसंस्करण, भण्डारण और हस्तन सहित कटाई-पश्चात प्रौद्योगिकी की जांच करना

  • जैव मसाला उत्पादन केलिए उपयुक्त तकनोलजियों का विकास करना

  • मृदा एवं पौधा जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों कोसलाहकार सेवाएं प्रदान करना, जैव अभिकारकों एवं अन्य जैव इनपुटों एवं उत्पादन तकनोलोजी अपीक्षाओं की आपूर्ति करना

  • निर्यातोन्मुख मसालों के उत्पादन और उनकी गुणवत्ता पीआर खास मामलों से जूझने में बोर्ड के विकास एवं विपणन विभागों को समर्थन करना

  • वैज्ञानिक-कृषक मेल-मिलाप, सामूहिक बैठकें, संगोष्ठियां, कार्यशालाएं, प्रदर्शन खंड, श्रव्य-दृश्य साधनों का निर्माण, विस्तार-समग्रियों का प्रकाशन जैसे विविध विस्तार कार्यकलापों के ज़रिए कृषकों एवं लक्ष्यीकृत वर्गों केलिए तकनोलजी का अंतरण ।

  • गुणवत्तायुक्त मसाला उत्पादन हेतु अच्छी कृषि-प्रथाओं पर कृषि विज्ञानियों और बेरोज़गार युवकों के वैज्ञानिक-कौशल के विकास केलिए और बोर्ड के विकास विभाग के स्टाफ केलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन ।

संगठनात्मक ढांचा

मुख्य स्टेशन – मैलाड़ुंपारा, इडुक्की जिला, केरल

क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन (2)

  1. सकलेशपुर (कर्नाटक)

  2. गान्तोक (सिक्किम का पूर्वी जिला तादोंग में)

सैटलाइट प्रयोगशालाएँ (1)

  1. मुख्यालय, कोचची की जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला । जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला मसाला-जैव प्रौद्योगिकी पर अनुसंधान कार्यक्रम चलाती है। यह अनुसंधान बजट के अंतर्गत अपना कार्य चलाते है।

परीक्षण-मूलक फार्म (पाँच नाग)

  1. मैलाडुम्पारा (केरल) - 64.47 हे.

  2. सकलेशपुर (कर्नाटक) - 19.00 हे.

  3. कबि (सिक्किम) - 6.00 हे.

  4. पाङ्ग्तांग (सिक्किम) - 6.00 हे.

अनुसंधान विभागों के अधीन के प्रमुख प्रभाग

  1. फसल सुधार

  2. जैव प्रौद्योगिकी

  3. पादप रोगविज्ञान

  4. कीटविज्ञान

  5. कृषि विज्ञान व मृदा-विज्ञान

  6. कटाई-उपरांत प्रौद्योगिकी

  7. तकनोलजी-अंतरण

समर्थक अनुभाग

  1. सांख्यिकी व कंप्यूटर

  2. पुस्तकालय और सूचना सेवा

  3. प्रशासन

  4. फार्म

आई सी आर आई, आर आर एस सकलेशपुर

आई सी आर आई का क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन सकलेशपुर शहर से मंगलुरू रोड की ओर करीब छह किलोमीटर की दूरी पर डोनिगल में स्थित है। कैंपस 50 एकड़ ज़मीन में फैला हुआ है और बंगलुरु-मंगलुरु हाइवे (ण एच 48) इसके सामने है। इस स्टेशन के चार प्रभाग हैं: फसल सुधार, कृषि विज्ञान और मृदा विज्ञान, कीट विज्ञान और पादप रोग विज्ञान। स्टेशन में कार्डमम जेर्मप्लासम एवं संबन्धित जीन एवं गार्सीनिया, दालचीनी, आलस्पाइस आदि के कए संग्रहण की 236 प्राप्तियाँ संरक्षित है।

 

आई सी आर आई, आर आर एस, सिक्किम

बड़ी इलायची केलिए भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान , स्पाइसेस बोर्ड का क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन, सिक्किम राजी शीट उत्तर पूर्वी प्रदेशों और पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग जिले केलिए स्थान-विशिष्ट अनुसंधान व विकास कार्यक्रम में जुट जाने हेतु 1981 में पूर्वी सिक्किम के पाङतांङ में स्थापित किया था। 1987 के दौरान, आर आर एस सिक्किम को भारतीय इलायची अनुसंस्थान संस्थान के अधीन स्पाइसेस बोर्ड के तीसरे अनुसंधान स्टेशन के रूप में लाया गया। आर आर एस अपने फार्म में उच्च उपजवाली लाइनें सहित 254 बड़ी इलायची प्राप्तियाँ सुरक्शित रखता है।