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Major Projects

अंतिम अद्यतन 27-06-2016, 13:52

प्रमुख परियोजनाएँ - आई सी आर आई

1. कृषि विज्ञान व मृदा विज्ञान प्रभाग

कृषि तकनीकों का मानकीकरण, ज़मीन की तैयारी , मृदा एवं जल प्रबंधन, नर्सरी प्रबंधन, रोपण तकनीक, पादप पोषण, पतवार प्रबंधन एवं अन्य कृषीय प्रथाएँ

  • इलायची केलिए एकीकृत पोशाक प्रबंधन (आई पी एम)

  • इलायची केलिए जैव कृषि कार्य

  • जैव इनपुटों(आदानों) का मूल्यांकन और कृषकों को कृषिकार्य तथा वैज्ञानिक दित्ताबेस सृजित करने हेतु पारंपरिक जानकारी

  • मौसम-विज्ञान संबंधी दित्तों का रिकार्डिंग

  • मौसम परिवर्तक, रोग प्रकोप, बीजाणु लोड एवं फसल पालन प्रथाओं से जुड़े दित्तों का प्रयोग कराते हुए संपुटिका सड़न रोग के प्रकोप संबंधी भविष्यवाणी केलिए एक गणितीय मॉडल का विकास

  • इलायची नमूनों में नाशीजीवनाशी अवशेष का मानीटरिंग

  • अन्य मसालों(वैनिला, कालीमिर्च, अदरक, हल्दी, लौंग, लहसुन एवं शाकीय मसाले शामिल हैं) केलिए कृषि-तकनीक

  • इलायची की खेती एवं प्रसंस्करण केलिए लायक फार्म मशीनीकरण, मूल्यांकन व मशीनरियों का विकास

  • इलायची में फर्टिगेशन (उर्वरण व सिंचाई) का तकनीक

  • मसालों का कटाई-पश्चात हस्तन, प्रसंस्करण तकनीक, पैकिंग एवं भंडारण

2. फसल सुधार प्रभाग

  • इलायची एवं संबन्धित वंशों में गुणात्मक व मात्रात्मक गुणविशेषताओं केलिए जर्मप्लासम संग्रहण, संरक्षण, मूल्यांकन और जीन पूल की सूची बनाना ।

  • चयन और संकरण तकनीकों के ज़रिए श्रेष्ठ गुणवत्तावाली संपुटिकाओं की इलायची ले स्थान-विशेष उच्च उपज देनेवाली क़िस्मों का विकास ।

  • जैव(नाशकजीव एवं रोग) तथा अजैव (सूखा, छाया) दबावों (प्रतिबलों) की सहिष्णुता केलिए प्रजनन ।

  • कृषकों के खेत में इलायची की क़िस्मों का क्षेत्र-अभिग्रहण-जांच ।

  • आई सी ए आर, एस ए यू, डी बी टी आदि अन्य अभिकरणों के सहयोग के साथ क़िस्मों की बहू-स्थानीय खेत-जांच ।

  • इलायची में शरीहक्रियात्मक अध्ययन।

  • अन्य मसालों पर अनुकूली - जांच ।

3. जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग

  • निम्नलिखित केलिए आण्विक मार्कर :

    1. छोटी इलायची का वांशिक विविधता विश्लेषण

    2. बड़ी इलायची का वांशिक विविधता विश्लेषण

    3. पौद अवस्था में जायफल का लिंग-निर्णयन

    4. इलायची से फ़्योसेरियाम पृथकृतों का आनुवांशिक विविधता - विश्लेषण

    5. मसालों के पुरातात्विक-वानस्पतिक नमूनों को पहचानना

    6. मसालों के मिलावटों को पहचानना

  • इलायची में कायिक भ्रूणोद्भव द्वारा ऊतक संवर्धन प्रोटोकॉल का विकास

  • आण्विक मार्कर से सहायता प्राप्त:

    1. काली कालीमिर्च के खेत-नमूनों का वाइरस सूचनांकन

    2. छोटी व बड़ी इलायची खेत नमूनों का वाइरस सूचनांकन

  • छोटी इलायची में माइक्रोसैटलाइट मार्करों का विकास

  • भविष्य आनुवांशिक एवं जीनोमिक अध्ययन केलिए और प्रजनन को त्वरित बनाने और जीन को स्थानीय बनाने केलिए संसाधन के रूप में इलायची अनुलेखीय अनुक्रमण

4. पादप रोग विज्ञान प्रभाग

  • इलायची की रोग पहचान और उसका नियंत्रण

    1. अषुकल(संपुटिका सड़न),

    2. राइज़ोम सड़न एवं नर्सरी सड़न रोगों और नर्सरियों की पादप सड़न

    3. पर्णचित्ती जैसे पारणीय और गौण रोग

    4. संपुटिका चित्ती और कुरचना एवं अन्य मूल सड़न, पीलेपन रोग आदि

  • कवक एवं बैक्टीरिया सहित प्रतिरोधी जीवाणुओं का प्रयोग करते हुए रोगों का जैव नियंत्रण

  • रोगों के प्रबंधन हेतु जैव-अभिकारकों (पी जी पी आर एवं पतिरोधी कवक) की प्रभावी स्थानीय किस्मों को पहचानना

  • स्पोर टाइप एवं जलवायू पैरामीटरों, रोग प्रकोपों का प्रयोग करते हुए रोग के भविष्यवाणी हेतु गणितीय मॉडल

  • इलायची के मृदाजन्य रोगों पर मृदा में सुधार के प्रभाव पर अध्ययन

  • वाइरल रोगों के प्रबंधन पर अध्ययन

  • काली कालीमिर्च जैसे अन्य मसालों केलिए अनुकूलीय जांच

5. कीटविज्ञान प्रभाग

  • इलायची केलिए एकीकृत नाशकजीव प्रबनहड्न (आई पी एम) का विकास, जैव पारिस्थितिकी, जीव-पारिस्थितिकी, नाशकजीव प्रबंधन में व्यावहारिक और शरीरक्रियात्मक रवैया

  • जैव-नियंत्रण उपास- जैव नाशकजीव रूपायन का विकास एवं जैव खेती प्रथाएं विकसित करने हेतु इलायची के नाशकजीवों के खिलाफ प्राकृतिक शत्रुओं का स्क्रीनिंग

  • इलायची में गौण नाशकजीवों का अध्ययन

  • संभाव्य नाशकजीव प्रकोप केलिए नाशकजीव निगरानी और पूर्वसूचना

6. फ़सलोत्तर प्रौद्योगिकी:

  • इलायची क्यूरिंग, वाइनिला प्रसंस्करण, शाकीय मसाला शुष्कन आदि फ़ासलोत्तर (कटाई-पाश्चात्) हस्तन, प्रसंस्करण तकनीय पर अनुसंधान कार्य

  • मसालों का पैकिंग और भण्डारण

  • सफ़ेद कालीमिर्च उत्पादन, कालीमिर्च क्यूरिंग आदि केलिए फार्म में ही मूल्य वर्द्धन तकनीक तैयार करना

7. तकनोलजी अंतरण

इस प्रभाव का उद्देश्य संस्थान की उपलब्धियों को रोपकों के खेत में प्रयोगार्थ अंतरित करते हुए वैज्ञानिकों एवं रोपकों के बीच की खाई को मिटाना है। यह मुख्यतः प्रशिक्षण कार्यक्रमों के ज़रिए, संगोष्ठियां, सामूहिक चर्चाएं, प्रदर्शनियाम चलाते हुए, मसाला क्लीनिकों के आयोजन से हासिल किया जाता है। संस्थाङ्के वैज्ञानिक संगोष्ठियों व रोपकों की बैठकों में विशेषज्ञों के रूप में सेवा प्रदान करते हैं।

  • कृषकों एवं उद्यमियों केलिए इलायची, वाइनिला और अन्य प्रमुख मसालों के उत्पादन, संरक्षण और कटाई-पश्चात् तकनोलजियों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • बेरोजगार युवाओं केलिए गुणवत्तायुक्त मसालों के उत्पादन हेतु अच्छी कृषि प्रथाओं (जी ए पी) पर दो महीनों का आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • कृषकों और एन जी ओ केलिए जैव-अभिकारम उत्पादन (ट्राइकोडेरमा, स्यूडोमोनास, ई पी एन) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण

  • स्पाइसेस बोर्ड विकास विभाग्म राज्य कृषि विभाग आदि से अद्यतन तकनोलजी/विकास कार्यों पर विस्तारण-परावर्तकों को प्रशिक्षण

  • खेत स्तर की समस्याओं को सुलझाने हेतु इलायची बढ़ानेवाले विविध स्थानों में मोबाइल स्पाइस क्लिनिक और कृषक-वैज्ञानिक मेल-मिलाप कार्यक्रम

बड़ी इलायची केलिए आर आर एस सिक्किम में प्रमुख परियोजनाएं

  • बड़ी इलायची जर्मप्लासम के संग्रहण, संरक्षण, मूल्यांकन और कैटलोगिंग

  • एम एल टी एस, सी वाई टी एस आदि के ज़रिए उच्च उपज, गुणवत्तावाली संपुटिका और व्यापक अभिग्रहण वाले श्रेष्ठ क्लोनों और संकरों का आनुवांशिक रूप से चयन

  • उच्च उपज देनेवालों केलिए बड़ी इलायची में संकरण

  • पोषक रोगों एवं नाशकजीवों तथा तुषारसहिष्णु केलिए प्रजनन

  • पोषक अपेक्षाएं, आबादी की सघनता, कृषि कार्य आदि कृषि तकनीकों का अनुकूलतम उपज प्रदान करने हेतु विकास

  • प्रमुख कीट-नाशकजीव का जीवविज्ञान, जीव परिस्थितिकी पर अध्ययन और प्रमुख कीट-नाशकजीवों केलिए नियंत्रण-उपाय विकसित करना

  • बड़ी इलायची के प्रमुख कवकीय और वाइरल रोगों पर अध्ययन

  • फुर्के एवं चिर्के तथा गुच्छा सड़न जैसे वाइरल रोगों का जानपदिक-रोगविज्ञान

  • उच्च गुणवत्तावाले उतपान हेतु कटाई पश्चात तकनोलजी विकास

  • विस्तारण कार्मिकों के ज़रिए रोपकों को तकनोलजी अंतरण.