सीआरईएस का मतलब है मसालों के निर्यातक के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र है। मसालों/मसाला उत्पादों के निर्यात/आयात के मामले में, बोर्ड द्वारा जारी किया गया ‘मसालों के निर्यातक के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र’ अनिवार्य है।.
सीआरईएस से संबन्धित सूचना के लिए कृपया बोर्ड की वेबसाईट https://www.indianspices.org.in/CRES_new/e-r-o/exporters- registration/form/Registration.php देखें
किसी बदलाव/आशोधन के लिए निर्यातक को बोर्ड के निकटतम कार्यालय में संपर्क करना होगा और प्रत्येक संशोधन/आशोधन के लिए रु. 5000+जीएसटी शुल्क के रूप में देना होगा।
जी हाँ, सभी निर्यातकों को नियमित रूप से तिमाही निर्यात विवरणी प्रस्तुत करना अनिवार्य है। तिमाही निर्यात विवरणी ऑनलाइन में भारी जा सकती है ।
अनिवार्य नमूनन से संबन्धित जानकारी के लिए कृपया http://indianspices.com/trade/trade-notifictions/notificationdetails.html/id=192 देखें और अधिक जानकारी के लिए निर्यातक, स्पाईसेस बोर्ड के निकटतम गुणवत्ता मूल्यांकन प्रयोगशाला से संपर्क कर सकता है।
बोर्ड के सभी पंजीकृत निर्यातकों को यूज़र आई डी और पासवर्ड दिए जाते हैं। अगर यूज़र आई डी और पासवर्ड नहीं दिया गया है तो सीआरईएस संख्या के आधार पर लॉगिन और पासवर्ड जारी करने हेतु कृपया sampling.sb-ker@gov.in से संपर्क करें। एक बार आई डी और पासवर्ड मिलने के बाद www.indianspices.org.in जाकर आप सूचना प्रपत्र भर सकते हैं।
नीलामकर्ता अनुज्ञप्ति के लिए कृपया http://indianspices.com/marketing/auctioneer.html और ब्यौहारी अनुज्ञप्ति के लिए http://indianspices.com/marketing/dealer देखें।
इस साल में आयेजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी की सूची वेबसाईट में उपलब्ध है और सहभागिता के लिए इच्छुक निर्यातक publicity.sb-ker@gov.inमें संपर्क कर सकते हैं।
फोरिन ट्रेड इंक्वाइरी बुलेटिन एक पाक्षिक प्रकाशन है जिसे निर्यातकों के हित केलिए विभिन्न स्रोतों से एकत्रित व्यापार पूछताछों से तैयार किया जाता है। इसका परिचालन केवल ऑनलाइन के माध्यम से होता है और इसका वार्षिक दर रु. 600 है। अधिक जानकारी के लिए प्रचार विभाग से संपर्क करें, फोन: 91-484-2333610-616 ई-मेल : publicity.sb-ker@gov.in
कृपया http://indianspices.com/training-calender.html देखें
कृपया http://indianspices.org.in/CRES_new/e-r-o/exporters-registration/form/pre.pdf देखें।
व्यापारी निर्यातक वह व्यक्ति है जो विनिर्माता से सामग्री खरीदकर अपने फर्म के नाम पर निर्यात करके व्यापार गतिविधि में लगा रहता है । विनिर्माता निर्यातक वह व्यक्ति है जो माल का विनिर्माण करता है, प्रसंस्करण के ज़रिए मूल्य बढ़ाता है और उसका निर्यात करता है या निर्यात करने का इरादा रखता है।
कृपया http://indianspices.com/sites/default/files/Export_Development_Promotion.pdf देखें।
आपके निकटतम स्पाईसेस बोर्ड कार्यालय से संपर्क करें। अधिकारी से संबंधित विवरण के लिए कृपया http://indianspices.com/trade/trade-notifications/notifiicationdetails.html?id=203 देखें।
कृपया http://www.indianspices.com/export/major-itemwise-export.html और http://www.indianspices.com/marketing/import.html देखें।
भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान का मुख्य उद्देश्य इलायची (छोटी एवं बड़ी) की उत्पादकता बढ़ाना एवं गुणवत्ता सुधार करना है जिससे निर्यात मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी और इस प्रकार मसाले किसानों की निवल आय बढ़ोगी। अनुसंधान मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु के छोटी इलायची उगाने वाले भूभाग तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों के बड़ी इलायची उगाने वाले क्षेत्रों पर केंद्रित है जिसमें पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग और दार्जिलिंग जिले शामिल हैं।
अनुसंधान के मुख्य क्षेत्र जैवप्रौद्योगिकी, फसल उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी का अंतरण हैं। फसल सुधार कार्यक्रम में चयन एवं संकरण द्वारा जर्मप्लास्म संरक्षण, किस्म का सुधार शामिल है।
1.बायो एजेंट उत्पादन 2.रोपण सामग्री वितरण 3.मसाला क्लिनिक्स 4.मृदा परीक्षण आधारित सलाहकार सेवाएँ 5.वैज्ञानिक फसल सलाहकार सेवाएँ 6. अल्प अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम 7.हितधारकों के लिए मौसम पूर्वानुमान सेवाएँ
इलायची उत्पादकों से प्राप्त मृदा नमूने का सभी मुख्य, द्वितीय, सूक्ष्म पोषक तत्वों एवं पी एच के लिए विश्लेषण किया जाएगा और मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा जिसमें उर्वरक सिफारिश शामिल है। इस सेवा इलायची उत्पादकों के लाभ के लिए बिना किसी लागत से प्रदान की जाती है।
किसानों को इलायची एवं काली मिर्च की गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री की आपूर्ति की जाती है। किसानों की माँग के अनुसार इलायची सकर्स की आपूर्ति मई से सितंबर तक की जाती है। इलायची अंकुर की आपूर्ति मार्च से मई तक की जाती है। काली मिर्च की आपूर्ति जून से नवंबर तक की जाती है।
केरल. 1. इलायची: प्रति सकर रु.50/- 2.. काली मिर्च: विशिष्ट किस्में – प्रति पादप रु.15/- कर्नाटक1.इलायची बीज (कर्नाटक के लिए): रु.5000/किलोग्राम 2. इलायची बीज क्षतचिह्न रु.60/किलोग्राम 3.इलायची अंकुर –प्रति अंकुर रु.15/- 4. काली मिर्च: प्रति रूटेड कटिंग रु.15/-
1. इलायची उत्पादन प्रौद्योगिकी 2. ई पी एन उत्पादन एवं अनुप्रयोग प्रौद्योगिकी 3. बायो एजेंट का उत्पादन एवं उपयोग (ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास)
हाँ। यूजी/पीजी छात्रों के लिए इंटर्नशिप का शुल्क (प्रति माह) रु.3000/- है।
हाँ। आईसीआरआई में पीजी छात्रों के लिए 3 महीने के लिए परियोजना करने का शुल्क 5000/- रुपये है (जैव प्रौद्योगिकी के लिए दर रु.7500/- है)। 6 महीने के लिए परियोजना करने का शुल्क 7500/- (जैव प्रौद्योगिकी के लिए दर रु.10000/- है)
कैप्सूल विगलन एवं प्रकंद विगलन रोग
इन बीमारियों को निम्नलिखित तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है; 1. मानसून की शुरुआत के पहले छाया नियमन 2.पादपों का ट्रैशिंग 3. पादप तल में पानी का प्रगतिरोध टालना 4. 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण का छिड़काव एवं 0.2 प्रतिशत कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का वृष्टिकरण (100 लीटर पानी में 20 ग्राम)
कट्टे, नीलगिरी नेक्रोसिस और कोक्के कंडु
ट्राइकोडर्मा हर्जियानम, स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस, बैसिलस सबटिलिस आदि छोटी इलायची में विगलन रोगों के प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले मुख्य जैव नियंत्रण एजेंट हैं।
फुसैरियम रोग मानसून के बाद एवं गर्मियों के महीमों के अंत तक होता है। इन रोगों को निम्नलिखित तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है 1. मानसून ऋतु के बाद मृदा का काम किया जा सकता है। 2. उजागर हुए जड़ को उपर की मृदा से कवर करें 3. उचित मल्च प्रदान कर सकता है 4. आवश्यकतानुसार उचित सिंचाई प्गदान कर सकता है 5. आवश्यकतानुसार पर्याप्त छाया प्रदान करें
थ्रिप्स, कैप्सूल एवं शूट बोरेर
क्विनालफोस, डिफेंथियूरोन एवं लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन
प्रत्येक पादप के पदप तल पर चारों ओर एंटोमो पातोजेनिक निमेटोड (ई पी एन) का अनुप्रयोग करने से छोटी इलायची में रूट ग्रब इन्सिडेन्स को प्रभावी रूप से नियंत्रित कर सकते हैं।
पत्ते में रोज़ेट को दिखाई देना, चर्मिल एवं तंग पत्ता, टिलर में कम विकास प्रक्रिया एवं जड़ों में नोडों को दिखाई देना छोटी इलायची में सूत्रकृमि ग्रसन के लक्षण हैं।