GST provisional registration details of Spices Board New Feature : Click here for Auction Report मसाला: छोटी इलायची, नीलाम की तारीख: 05-Dec-2019, नीलामकर्ता: Cardamom Planters' Association, Santhanpara, लोटों की संख्या: 94, आवक की मात्रा(कि.ग्रा.): 15129.8, बिकी मात्रा (कि.ग्रा.): 13258, अधिकतम मूल्य (रु./कि.ग्रा.): 2996.00, औसत मूल्य (रु./कि.ग्रा.): 2796.47 मसाला: छोटी इलायची, नीलाम की तारीख: 05-Dec-2019, नीलामकर्ता: The Cardamom Processing & Marketing Co-Operative Society Ltd, Kumily, लोटों की संख्या: 278 , आवक की मात्रा(कि.ग्रा.): 66537.5, बिकी मात्रा (कि.ग्रा.): 64395.7, अधिकतम मूल्य (रु./कि.ग्रा.): 3168.00, औसत मूल्य (रु./कि.ग्रा.): 2834.62 Spice: Large Cardamom, Date: 05-Dec-2019, Market: Singtam, Type: Badadana, Price (Rs./Kg): 438, Spice: Large Cardamom, Date: 05-Dec-2019, Market: Singtam, Type: Chotadana, Price (Rs./Kg): 400, Spice: Large Cardamom, Date: 05-Dec-2019, Market: Gangtok, Type: Badadana, Price (Rs./Kg): 450, Spice: Large Cardamom, Date: 05-Dec-2019, Market: Gangtok, Type: Chotadana, Price (Rs./Kg): 400, Spice: Large Cardamom, Date: 05-Dec-2019, Market: Siliguri, Type: Badadana, Price (Rs./Kg): 520, Spice: Large Cardamom, Date: 05-Dec-2019, Market: Siliguri, Type: Chotadana, Price (Rs./Kg): 407,

एफ ए क्यू


सीआरईएस क्या है और निर्यात केलिए सीआरईएस क्यों आवश्यक है?

सीआरईएस का मतलब है मसालों के निर्यातक के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र है। मसालों/मसाला उत्पादों के निर्यात/आयात के मामले में, बोर्ड द्वारा जारी किया गया ‘मसालों के निर्यातक के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र’ अनिवार्य है।.

मैं सीआरईएस के लिए कैसे आवेदन करूँ और सीआरईएस के नये आवेदन के लिए कितना शुल्क है?

सीआरईएस से संबन्धित सूचना के लिए कृपया बोर्ड की वेबसाईट https://www.indianspices.org.in/CRES_new/e-r-o/exporters- registration/form/Registration.php देखें

सीआरईएस में बदलाव लाने की प्रक्रिया क्या है?

किसी बदलाव/आशोधन के लिए निर्यातक को बोर्ड के निकटतम कार्यालय में संपर्क करना होगा और प्रत्येक संशोधन/आशोधन के लिए रु. 5000+जीएसटी शुल्क के रूप में देना होगा।

क्या तिमाही निर्यात विवरणी प्रस्तुत करना अनिवार्य है?

जी हाँ, सभी निर्यातकों को नियमित रूप से तिमाही निर्यात विवरणी प्रस्तुत करना अनिवार्य है। तिमाही निर्यात विवरणी ऑनलाइन में भारी जा सकती है ।

यह कैसे जाँज करें कि जो मसाला मैं निर्यात कर रहा हूं वह अनिवार्य परीक्षण के अंतर्गत आता है या नहीं?

अनिवार्य नमूनन से संबन्धित जानकारी के लिए कृपया http://indianspices.com/trade/trade-notifictions/notificationdetails.html/id=192 देखें और अधिक जानकारी के लिए निर्यातक, स्पाईसेस बोर्ड के निकटतम गुणवत्ता मूल्यांकन प्रयोगशाला से संपर्क कर सकता है।

मैं कैसे परेषण-पूर्व नमूनन करूँ?

बोर्ड के सभी पंजीकृत निर्यातकों को यूज़र आई डी और पासवर्ड दिए जाते हैं। अगर यूज़र आई डी और पासवर्ड नहीं दिया गया है तो सीआरईएस संख्या के आधार पर लॉगिन और पासवर्ड जारी करने हेतु कृपया sampling.sb-ker@gov.in से संपर्क करें। एक बार आई डी और पासवर्ड मिलने के बाद www.indianspices.org.in जाकर आप सूचना प्रपत्र भर सकते हैं।

इलाईची ब्यौहारी व नीलामकर्ता अनुज्ञप्ति के लिए कैसे आवेदन करें?

नीलामकर्ता अनुज्ञप्ति के लिए कृपया http://indianspices.com/marketing/auctioneer.html और ब्यौहारी अनुज्ञप्ति के लिए http://indianspices.com/marketing/dealer देखें।

मैं स्पाईसेस बोर्ड के साथ अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में कैसे सह-प्रतिभागी बनूँ?

इस साल में आयेजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी की सूची वेबसाईट में उपलब्ध है और सहभागिता के लिए इच्छुक निर्यातक publicity.sb-ker@gov.inमें संपर्क कर सकते हैं।

फोरिन ट्रेड इंक्वाइरी बुलेटिन के लिए मैं कैसे सदस्यता ले सकता हूं?

फोरिन ट्रेड इंक्वाइरी बुलेटिन एक पाक्षिक प्रकाशन है जिसे निर्यातकों के हित केलिए विभिन्न स्रोतों से एकत्रित व्यापार पूछताछों से तैयार किया जाता है। इसका परिचालन केवल ऑनलाइन के माध्यम से होता है और इसका वार्षिक दर रु. 600 है। अधिक जानकारी के लिए प्रचार विभाग से संपर्क करें, फोन: 91-484-2333610-616 ई-मेल : publicity.sb-ker@gov.in

मैं स्पाईसेस बोर्ड के विपणन और प्रशिक्षण से संबंधित कार्यक्रम के बारे में कैसे जानकारी प्राप्त करूँ?

कृपया http://indianspices.com/training-calender.html देखें

सीआरईएस के लिए आवश्यक पूर्वापेक्षित दस्तावेज़ क्या-क्या हैं?

कृपया http://indianspices.org.in/CRES_new/e-r-o/exporters-registration/form/pre.pdf देखें।

व्यापारी और विनिर्माता मसाला निर्यातक के बीच क्या अंतर है?

व्यापारी निर्यातक वह व्यक्ति है जो विनिर्माता से सामग्री खरीदकर अपने फर्म के नाम पर निर्यात करके व्यापार गतिविधि में लगा रहता है । विनिर्माता निर्यातक वह व्यक्ति है जो माल का विनिर्माण करता है, प्रसंस्करण के ज़रिए मूल्य बढ़ाता है और उसका निर्यात करता है या निर्यात करने का इरादा रखता है।

बोर्ड के साथ पंजीकृत मसाला निर्यातकों के लिए उपलब्ध विपणन योजनाएँ क्या-क्या हैं?

कृपया http://indianspices.com/sites/default/files/Export_Development_Promotion.pdf देखें।

मसालों के निर्यात से संबंधित अधिक जानकारी के लिए मैं किससे संपर्क करूँ?

आपके निकटतम स्पाईसेस बोर्ड कार्यालय से संपर्क करें। अधिकारी से संबंधित विवरण के लिए कृपया http://indianspices.com/trade/trade-notifications/notifiicationdetails.html?id=203 देखें।

मसालों के पिछले पाँच वर्षों के आयात व निर्यात से संबंधित आंकडे मुझे कहाँ मिलेंगे?

कृपया http://www.indianspices.com/export/major-itemwise-export.html और http://www.indianspices.com/marketing/import.html देखें।

स्पाइसेस बोर्ड की स्थापना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य क्या है?

स्पाइसेस बोर्ड, स्पाइसेस बोर्ड अधिनियम 1986 के अंतर्गत 26 फरवरी 1986 को पूर्ववर्ती इलायची बोर्ड एवं स्पाइस निर्यात संवर्धन परिषद् के विलयन से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत गठित किया गया एक सांविधिक संगठन है जो 52 अनुसूचित मसालों के निर्यात संवर्धन और इलायची (छोटी एवं बड़ी) के विकास एवं अनुसंधान हेतु उत्तरदायी है। स्पाइसेस बोर्ड भारतीय मसालों के विकास एवं विश्वव्यापक संवर्धन के लिए अग्रणी संगठन है। बोर्ड भारतीय मसालों की उत्कृष्टता के लिए गतिविधियों की अगुवाई कर रहा है ताकि भारतीय मसाले उद्योग को अतर्राष्ट्रीय प्रसंस्करण हब एवं वैश्विक मसाले विपणन के औद्योगिक, खुदरा एवं खाद्य सेवा खण्डों के साफ़ एवं मूल्य वर्धित मसाले एवं शाक का मुख्य आपूर्तिकर्ता बनने की विज़न प्राप्त करने के लिए मदद मिल सके।

स्पाइसेस बोर्ड के मुख्य प्रकार्य क्या-क्या हैं?

स्पाइसेस बोर्ड उत्पादन, उत्पादकता एवं गुणवत्ता सुधार करने के संदर्भ में इलायची (छोटी एवं बड़ी) के समग्र विकास के लिए उत्तरदायी है। बोर्ड निर्यात के लिए 52 अनुसूचित मसालों की गुणवत्ता सुधार के लिए कटाई-उपरांत सुधार कार्यक्रमों का कार्यान्वयन कर रहा है। बोर्ड के विविध विकास कार्यक्रम एवं कटाई-उपरांत गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम ‘निर्यातोन्मुख उद्पादन’ के तहत शामिल किए गए हैं।

मसाले उत्पादकों को स्पाइसेस बोर्ड से प्राप्त यहायताएँ क्या-क्या हैं?

2021-22 से 2025-26 के दौरान बोर्ड रोपण सामग्री उत्पादन, इलायची (छोटी एवं बड़ी) के लिए पुनर्रोपण एवं सिंचाई सुविधाएँ, कटाई उपरांत सुधार उपकरणों की आपूर्ति, जैव खेती का संवर्धन, उत्तरपूर्वी क्षेत्र में निर्यात योग्य मसालों का उत्पादन, मसालों के कटाई उपरांत गुणवत्ता सुधार के लिए एफ पी ओ को समर्थन, मसाले सेक्टर में नवप्रवर्तन का संवर्धन, क्षेत्र स्तर पर बुनियादी गुणवत्ता परीक्षण उपकरणों की स्थापना, इलायची (छोटी) के लिए बीमा के लिए सहायता प्रदान करेगा। अधिक जानकारी के लिए लिंक देखें।

स्पाइसेस बोर्ड से सहायता प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ कौन से हैं?

आधार कार्ड, बागान के भूमि कर रसीद/पर्चा/आर टी सी/ चिट्टा अडंगल/पनी, संबंधित क्षेत्रों की योजनाओं के लिए विनिर्दिष्ट बैंक पासबुक एवं अन्य समर्थक दस्तावेज़। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए कृपया निकट के क्षेत्र कार्यालय से संपर्क करें।

सहायता प्राप्त करने के लिए किसे संपर्क करें और संबंधित कार्यालय का पता कैसे लगाएँ जिसके अंतर्गत किसान का क्षेत्र आता है?

विवरण प्राप्त करने के लिए स्पाइसेस बोर्ड के संबंधित कार्यालय से संपर्क करें और लिंक देखने पर बोर्ड के कार्यालयों का पता लगा सकता है। किसी भी मार्गदर्शन के लिए मुख्यालय, स्पाइसेस बोर्ड, कोच्ची, केरल से भी संपर्क कर सकते हैं।

मसाले प्रदायकों की सूची मुझे कहाँ मिल सकती है?

मसाले के प्रदायकों के विवरण प्राप्त करने के लिए कृपया लिंक देखें। यहाँ क्लिक करें

छोटी एवं बड़ी इलायची की लागत के विवरण कहाँ से मिल सकता है?

अधिक जानकारी के लिए कृपया लिंक देखें।

भारत में मसाले उत्पादन करने वाले क्षेत्र/ राज्य कौन से हैं?

अधिक जानकारी के लिए लिए लिंक देखें।

जी आई टैगिंग वाले मसाले फसलों के नाम

मलबार पेप्पर, कूर्ग ग्रीन कार्डमम, आलप्पी ग्रीन कार्डमम, नागा चिल्ली, गुण्डूर सन्नम चिल्ली, ब्यादगी मिर्च, सिक्किम बड़ी इलायची, मिज़ो मिर्च, असम कारबियांगलोंग जिंजर, वैगन हल्दी, कंधमाल हल्दी, उत्तराखंड तेजपात, भिवपुर मिर्च, कश्मीर केसर एवंसिराराखोंग मिर्च एवंऔर सिराराखोंग मिर्च, दल्ले खुरचानी और कन्याकुमारी लौंग। इनमें से मलबार पेप्पर, कूर्ग ग्रीन कार्डमम, आलप्पी ग्रीन कार्डमम, गुण्डूर सन्नम चिल्ली एवं ब्यादगी मिर्च स्पाइसेस बोर्ड के स्वामित्व के अधीन पंजीकृत किया हैं।

उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में व्यायसायिक रूप से खेती किए जाने वाले मसाले कौन- से हैं ?

बड़ी इलायची, मिर्च, अदरक, हल्दी, दालचीनी एवं कालीमिर्च

मुख्य मसाले के फसल

अधिक जानकारी के लिए कृपया लिंक देखें।

अनिवार्य निर्यात निरीक्षण से क्या अभिप्राय है?

अनिवार्य निर्यात निरीक्षण वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से निर्यात से पहले मसालों की खेप (कंसाइनमेंट) की सुरक्षा और गुणवत्ता को निर्धारित मापदण्डों (स्पेसिफाइड पैरामीटर्स) के अनुसार सुनिश्चित किया जाता है।

मसालों को अनिवार्य निर्यात निरीक्षण के अंतर्गत अधिसूचित करने के क्या मापदण्ड हैं?

अनिवार्य निरीक्षण के लिए मसालों का चयन निम्न आधारों पर किया जाता है: • अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से संबंधित अस्वीकृतियों (रिजेक्शन) या अलर्ट की घटनाएँ, तथा • आयातक देशों के साथ किए गए समझौते।

अनिवार्य निर्यात निरीक्षण के लिए विश्लेषण के मापदण्ड (Parameters of Analysis) अधिसूचित करने के क्या मापदण्ड हैं?

अनिवार्य निरीक्षण के लिए विश्लेषण के मापदण्ड निम्न आधारों पर निर्धारित किए जाते हैं: • अंतरराष्ट्रीय बाजार में मसालों की खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से संबंधित अस्वीकृतियों या अलर्ट की घटनाएँ, तथा • आयातक देशों के साथ किए गए समझौते।

प्रयोगशालाएँ विश्लेषणात्मक सेवाओं की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित करती हैं?

सभी क्वालिटी इवैल्युएशन लैबोरेटरीज़ (QELs) अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विश्लेषण विधियों का पालन करती हैं। तकनीकी कर्मचारियों को इस क्षेत्र में नवीनतम प्रगति के अनुसार नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे निरंतर सुधार सुनिश्चित हो सके। QELs ISO 17025 (NABL) से मान्यता प्राप्त हैं तथा विश्लेषणात्मक सेवाओं की गुणवत्ता का आत्म-मूल्यांकन करने के लिए नियमित रूप से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अंतर-प्रयोगशाला जांच नमूना कार्यक्रमों (Inter-laboratory Check Sample Programmes) और प्रवीणता परीक्षण कार्यक्रमों (Proficiency Testing Programmes) में भाग लेती हैं।

प्रयोगशालाएँ विश्लेषणात्मक सेवाओं में निष्पक्षता और गोपनीयता कैसे सुनिश्चित करती हैं?

एक नियामक संस्था होने के नाते, ये प्रयोगशालाएँ किसी भी प्रकार के मसाला व्यवसाय में संलग्न नहीं होतीं। प्रयोगशालाओं में स्पष्ट रूप से परिभाषित नीतियाँ लागू हैं तथा विश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए कोडिंग/डिकोडिंग की आंतरिक प्रणाली अपनाई जाती है।

QEL में कौन-कौन से परीक्षण किए जाते हैं?

QEL में किए जाने वाले परीक्षणों की विस्तृत जानकारी के लिए कृपया www.indianspices.com पर जाएँ: (पाथ: Quality → Analytical Services and Fee)

विश्लेषण के लिए आवश्यक नमूने का आकार कितना है और विश्लेषण में कितने दिन लगते हैं?

नमूने के आकार तथा विश्लेषण में लगने वाले समय की विस्तृत जानकारी के लिए कृपया www.indianspices.com पर जाएँ: (पाथ: Quality → Analytical Services and Fee)

क्या स्पाइसेज़ बोर्ड की प्रयोगशालाएँ NABL से मान्यता प्राप्त हैं?

इस संबंध में जानकारी के लिए कृपया www.indianspices.com पर जाएँ: (पाथ: Quality → Quality Evaluation Laboratory)

क्या QELs द्वारा कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं?

हाँ। निर्यातकों तथा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ये प्रशिक्षण अनुरोध के आधार पर और आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार आयोजित होते हैं।

क्या प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए उच्च स्तरीय (हाई-एंड) मशीनें उपलब्ध हैं?

इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए कृपया www.indianspices.com पर जाएँ: (पाथ: Quality → Quality Evaluation Laboratory)

नमूना जमा करने और परीक्षण परिणाम प्राप्त करने के लिए किससे संपर्क करना चाहिए?

नमूना जमा करने और परीक्षण परिणाम प्राप्त करने के लिए ग्राहक/निर्यातक को प्रयोगशाला से संबद्ध मार्केटिंग कार्यालय के संबंधित EPO / AD / DD से संपर्क करना चाहिए।

अनिवार्य सैम्पलिंग एवं परीक्षण के अंतर्गत कौन‑कौन से पैरामीटर आते हैं और उनकी स्वीकार्य सीमाएँ (Permissible Limits) क्या हैं?

अनिवार्य सैम्पलिंग और परीक्षण से संबंधित पैरामीटर तथा उनकी स्वीकार्य सीमाओं की जानकारी के लिए कृपया स्पाइसेज़ बोर्ड परिपत्र संख्या 19/2020, दिनांक 31 दिसम्बर 2020 को देखें: http://www.indianspices.com/indianspices/trade/trade-notifications/notificationdetails.html?id=192

ISO/IEC 17025 क्या है और इसका महत्व क्या है?

ISO/IEC 17025 प्रयोगशालाओं की तकनीकी दक्षता, तथा परीक्षण रिपोर्ट की विश्वसनीयता और सटीकता से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानक है। इस मानक के अंतर्गत प्रयोगशालाओं का मूल्यांकन एक स्वतंत्र मान्यता निकाय द्वारा किया जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होती है। इसी कारण ISO/IEC 17025 से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला द्वारा जारी परीक्षण रिपोर्ट को विश्व‑भर में स्वीकार किया जाता है।

क्या QELs में ताज़े (Fresh) नमूनों की जांच की जाती है?

नहीं। चूँकि प्रयोगशालाएँ केवल सूखे स्वरूप (Dried Form) में मसालों और मसाला उत्पादों की जांच करती हैं, इसलिए केवल सूखे नमूनों को ही परीक्षण के लिए स्वीकार किया जाता है।

नमूने कैसे भेजें और सूक्ष्मजैविक (Microbiological) विश्लेषण के लिए किस प्रकार की पैकिंग आवश्यक है?

नमूने भेजने की प्रक्रिया और शुल्क संबंधी विस्तृत जानकारी के लिए कृपया www.indianspices.com पर जाएँ: (पाथ: Quality → Analytical Services and Fee) नोट: सूक्ष्मजैविक परीक्षण के लिए नमूने एसेप्टिक (संक्रमण‑रहित), स्वच्छ और स्टेराइल पाउच/कंटेनरों में ही भेजे जाने चाहिए।

क्या भौतिक (Physical), रासायनिक (Chemical) और जैविक (Biological) परीक्षण के लिए एक ही पैकेट में नमूना भेजा जा सकता है?

भौतिक एवं रासायनिक परीक्षण पैरामीटरों के लिए एक नमूना भेजा जा सकता है। हालाँकि, सूक्ष्मजैविक (Microbiology) परीक्षण के लिए नमूना अलग से, एसेप्टिक (संक्रमण‑रहित) तरीके से पैक किया हुआ होना चाहिए। नमूने का आकार और पैकिंग विवरण Form 75 (Quality → Analytical Services) में उपलब्ध है, जिसे www.indianspices.com पर देखा जा सकता है।

मिर्च (Chilli) का निर्यात किसी विदेशी देश में कैसे किया जाए?

मिर्च के निर्यात की प्रक्रिया और निर्यातक पंजीकरण के लिए कृपया स्पाइसेज़ बोर्ड की वेबसाइट पर जाएँ: https://www.indianspices.org.in/CRES_new/e-r-o/exporters-registration/form/Registration.php

विश्लेषण (Analysis) कराने के लिए भुगतान कैसे किया जाए?

विश्लेषण शुल्क और भुगतान की प्रक्रिया से संबंधित विवरण के लिए कृपया निम्न लिंक पर जाएँ: http://www.indianspices.com/analytical-services-fees.html

यह कैसे पता करें कि नमूना प्राप्त हुआ है या नहीं?

नमूना प्राप्ति की पुष्टि के लिए संबंधित Sample Receipt Desk (SRD) / नमूना प्राप्ति काउंटर से संपर्क करें।

यह कैसे जानें कि विश्लेषण पूरा हुआ है या नहीं?

विश्लेषण पूरा होने के बाद ई‑मेल के माध्यम से सूचना भेजी जाती है। यदि आपका ई‑मेल पता अद्यतन नहीं है या ई‑मेल प्राप्त नहीं हुआ है, तो आगे के मार्गदर्शन के लिए संबंधित QEL / SRD से संपर्क करें।

परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने में कितना समय लगता है?

रिपोर्ट प्राप्त करने में लगने वाला समय परीक्षण के पैरामीटर पर निर्भर करता है। विस्तृत जानकारी के लिए कृपया निम्न वेबसाइट देखें: http://www.indianspices.com/analytical-services-fees.html

आई सी आर आई का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान का मुख्य उद्देश्य इलायची (छोटी एवं बड़ी) की उत्पादकता बढ़ाना एवं गुणवत्ता सुधार करना है जिससे निर्यात मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी और इस प्रकार मसाले किसानों की निवल आय बढ़ोगी। अनुसंधान मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु के छोटी इलायची उगाने वाले भूभाग तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों के बड़ी इलायची उगाने वाले क्षेत्रों पर केंद्रित है जिसमें पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग और दार्जिलिंग जिले शामिल हैं।

आई सी आर आई के मुख्य अनुसंधान क्षेत्र क्या-क्या हैं?

अनुसंधान के मुख्य क्षेत्र जैवप्रौद्योगिकी, फसल उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी का अंतरण हैं। फसल सुधार कार्यक्रम में चयन एवं संकरण द्वारा जर्मप्लास्म संरक्षण, किस्म का सुधार शामिल है।

अंतरण प्रौद्योगिकी एवं किसान-उन्मुख कार्यक्रम क्या- क्या हैं?

1.बायो एजेंट उत्पादन 2.रोपण सामग्री वितरण 3.मसाला क्लिनिक्स 4.मृदा परीक्षण आधारित सलाहकार सेवाएँ 5.वैज्ञानिक फसल सलाहकार सेवाएँ 6. अल्प अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम 7.हितधारकों के लिए मौसम पूर्वानुमान सेवाएँ

एक किसान कैसे आई सी आर आई में मृदा परीक्षण सेवा उपलब्ध कर सकता है?

इलायची उत्पादकों से प्राप्त मृदा नमूने का सभी मुख्य, द्वितीय, सूक्ष्म पोषक तत्वों एवं पी एच के लिए विश्लेषण किया जाएगा और मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा जिसमें उर्वरक सिफारिश शामिल है। इस सेवा इलायची उत्पादकों के लाभ के लिए बिना किसी लागत से प्रदान की जाती है।

आई सी आर आई में उपलब्ध गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री क्या-क्या हैं?

किसानों को इलायची एवं काली मिर्च की गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री की आपूर्ति की जाती है। किसानों की माँग के अनुसार इलायची सकर्स की आपूर्ति मई से सितंबर तक की जाती है। इलायची अंकुर की आपूर्ति मार्च से मई तक की जाती है। काली मिर्च की आपूर्ति जून से नवंबर तक की जाती है।

आई सी आर आई से आपूर्ति की गई रोपण सामग्री की लागत क्या है?

केरल. 1. इलायची: प्रति सकर रु.50/- 2.. काली मिर्च: विशिष्ट किस्में – प्रति पादप रु.15/- कर्नाटक1.इलायची बीज (कर्नाटक के लिए): रु.5000/किलोग्राम 2. इलायची बीज क्षतचिह्न रु.60/किलोग्राम 3.इलायची अंकुर –प्रति अंकुर रु.15/- 4. काली मिर्च: प्रति रूटेड कटिंग रु.15/-

आई सी आर आई द्वारा आयोजित अल्प अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम क्या-क्या हैं?

1. इलायची उत्पादन प्रौद्योगिकी 2. ई पी एन उत्पादन एवं अनुप्रयोग प्रौद्योगिकी 3. बायो एजेंट का उत्पादन एवं उपयोग (ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास)

क्या आईसीआरआई में यूजी/पीजी छात्रों के लिए इंटर्नशिप करने का कोई अवसर है? अगर है तो उसीके लिए शुल्क क्या होगा?

हाँ। यूजी/पीजी छात्रों के लिए इंटर्नशिप का शुल्क (प्रति माह) रु.3000/- है।

क्या आईसीआरआई में पीजी छात्रों के लिए प्रोजेक्ट करने का कोई अवसर है? यदि हां, तो उसीके लिए कितनी शुल्क होगा ?

हाँ। आईसीआरआई में पीजी छात्रों के लिए 3 महीने के लिए परियोजना करने का शुल्क 5000/- रुपये है (जैव प्रौद्योगिकी के लिए दर रु.7500/- है)। 6 महीने के लिए परियोजना करने का शुल्क 7500/- (जैव प्रौद्योगिकी के लिए दर रु.10000/- है)

छोटी इलायची के मुख्य मानसून रोग क्या-क्या हैं?

कैप्सूल विगलन एवं प्रकंद विगलन रोग

इन रोगों को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

इन बीमारियों को निम्नलिखित तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है; 1. मानसून की शुरुआत के पहले छाया नियमन 2.पादपों का ट्रैशिंग 3. पादप तल में पानी का प्रगतिरोध टालना 4. 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण का छिड़काव एवं 0.2 प्रतिशत कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का वृष्टिकरण (100 लीटर पानी में 20 ग्राम)

छोटी इलायची में कौन-कौन विषाणु रोग होते हैं?

कट्टे, नीलगिरी नेक्रोसिस और कोक्के कंडु

छोटी इलायची में विगलन रोगों के प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले मुख्य जैव नियंत्रण एजेंट कौन से हैं?

ट्राइकोडर्मा हर्जियानम, स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस, बैसिलस सबटिलिस आदि छोटी इलायची में विगलन रोगों के प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले मुख्य जैव नियंत्रण एजेंट हैं।

फुसैरियम रोग कब होता है और नियंत्रण के उपाय क्या हैं?

फुसैरियम रोग मानसून के बाद एवं गर्मियों के महीमों के अंत तक होता है। इन रोगों को निम्नलिखित तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है 1. मानसून ऋतु के बाद मृदा का काम किया जा सकता है। 2. उजागर हुए जड़ को उपर की मृदा से कवर करें 3. उचित मल्च प्रदान कर सकता है 4. आवश्यकतानुसार उचित सिंचाई प्गदान कर सकता है 5. आवश्यकतानुसार पर्याप्त छाया प्रदान करें

छोटी इलायची में प्रमुख कीट कौन-कौन से हैं?

थ्रिप्स, कैप्सूल एवं शूट बोरेर

छोटी इलायची में कौन-कौन से कीटनाशक लगा रहे हैं जो केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड (सी आई बी) एवं पंजीकरण समिति में पंजीकृत हैं?

क्विनालफोस, डिफेंथियूरोन एवं लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन

छोटी इलायची में हम रूट ग्रब इन्सिडेन्स को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं?

प्रत्येक पादप के पदप तल पर चारों ओर एंटोमो पातोजेनिक निमेटोड (ई पी एन) का अनुप्रयोग करने से छोटी इलायची में रूट ग्रब इन्सिडेन्स को प्रभावी रूप से नियंत्रित कर सकते हैं।

छोटी इलायची में सूत्रकृमि ग्रसन के लक्षण क्या-क्या हैं?

पत्ते में रोज़ेट को दिखाई देना, चर्मिल एवं तंग पत्ता, टिलर में कम विकास प्रक्रिया एवं जड़ों में नोडों को दिखाई देना छोटी इलायची में सूत्रकृमि ग्रसन के लक्षण हैं।